मेरा नाम अर्जुन है, हालांकि मेरे दोस्त और परिवार वाले मुझे इसी नाम से पुकारते हैं। गोपनीयता के कारण, मैं अपना पूरा नाम यहाँ नहीं बता रहा हूँ।
मैं एक साधारण दिखने वाला लंबा लड़का हूँ, जो केरल के एक शांत गाँव से ताल्लुक रखता हूँ। मुझे हमेशा से नई शुरुआत और रोमांच की कहानियाँ आकर्षित करती रही हैं। मैं अक्सर उन कहानियों को पढ़ता था, जिनमें लोग नए स्थानों पर जाकर नया जीवन शुरू करते थे। इन कहानियों से प्रेरित होकर, मैंने अपनी कहानी आपसे साझा करने का फैसला किया।
यह कहानी तब की है, जब मैंने शिमला के एक कॉलेज में दाखिला लिया था। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मैं एक कोचिंग संस्थान में अतिरिक्त कक्षाएँ भी लेना चाहता था। मेरे परिवार ने मेरा समर्थन किया और मुझे शिमला भेजने का फैसला किया, जो अपनी ठंडी जलवायु और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
शिमला पहुँचने के बाद, मेरा पहला काम रहने के लिए एक जगह ढूंढना था। मैंने अपने दोस्त विक्रम को फोन किया, जो पहले से ही वहाँ रह रहा था। उसने मुझे अपने घर बुलाया। वहाँ पहुँचकर मैंने तरोताजा हुआ, और हमने कुछ देर तक बातें कीं। फिर, थोड़ा आराम करने के बाद, हम दोनों मेरे लिए एक किराए का कमरा ढूंढने निकल पड़े।
विक्रम के घर से लगभग एक किलोमीटर दूर हमें एक घर के बाहर एक बोर्ड दिखा, जिस पर लिखा था कि किराए के लिए कमरा उपलब्ध है। हमने दरवाजे की घंटी बजाई, और एक मैडम ने दरवाजा खोला। हमने कमरे के बारे में पूछा, तो उन्होंने हमें अंदर आने को कहा।
अंदर जाने के बाद, मैडम हमें ऊपरी मंजिल पर कमरा दिखाने ले गईं। कमरा देखने के बाद, मुझे वह पसंद आ गया। मुझे अभी ज्यादा सोचने का समय नहीं था, क्योंकि मुझे तुरंत सामान रखने के लिए जगह चाहिए थी। मैंने सोचा कि अगर बाद में कोई समस्या हुई, तो मैं दूसरी जगह जा सकता हूँ।
मैंने मैडम से पूछा, “मैडम, मैं कब से यहाँ शिफ्ट हो सकता हूँ?”
उन्होंने कहा, “जब तुम चाहो।”
मैंने कहा, “मैडम, मैं आज ही सामान रख लेता हूँ।”
मैडम ने मुस्कुराते हुए कहा, “हमें कोई दिक्कत नहीं है।”
मैडम से बात करने के बाद, मैं और विक्रम उसके घर वापस गए और सामान शिफ्ट करने की तैयारी करने लगे। जब मैं सामान लेकर उस घर में वापस पहुँचा, तो इस बार दरवाजा एक लड़की ने खोला। उसे देखकर मैं थोड़ा झिझका, लेकिन उसका चेहरा देखकर मेरी नजरें उस पर टिक गईं।
वह एक खूबसूरत लड़की थी, जिसने उस वक्त एक साधारण कुर्ती और पायजामा पहना था। उसके लंबे, मुलायम बाल पीछे की ओर खुले हुए थे। मैंने उससे कहा, “हम कुछ देर पहले कमरे के लिए बात करने आए थे।”
तभी पीछे से मैडम आईं और बोलीं, “अरे रिया, ये नए किरायेदार हैं, इन्हें अंदर आने दे।”
मैडम के कहने पर वह हट गई, और हमें अंदर आने को कहा गया। मैंने देखा कि उसकी चाल में एक अलग ही सादगी थी, जो मुझे आकर्षक लगी।
अंदर जाने के बाद, हमने सामान सीढ़ियों के पास रख दिया। कमरे में एक सोफे पर एक अंकल बैठे थे। मैडम ने परिचय करवाया, “ये रिया के पापा हैं, और ये हमारी बेटी रिया है।” हमने अंकल को नमस्ते किया, और उन्होंने हमें बैठने को कहा।
मैडम किचन की ओर चली गईं, शायद हमारे लिए चाय लाने। तब तक अंकल ने मुझसे बात शुरू की। उन्होंने मेरी पढ़ाई और परिवार के बारे में पूछा। अंकल ने बताया कि वह एक प्रतिष्ठित बैंक में प्रबंधक हैं। बातचीत के दौरान मैडम हमारे लिए कॉफी लेकर आईं।
कुछ देर तक इधर-उधर की बातें हुईं, फिर हम अपने कमरे में सामान रखने के लिए चले गए। जाते समय मैडम ने पूछा, “खाने का इंतजाम कैसे करोगे?” मैंने कहा, “जब तक कुछ इंतजाम नहीं हो जाता, मैं बाहर किसी ढाबे पर खा लूँगा।”
मैडम बोलीं, “जब तक तुम्हारा खाने का इंतजाम नहीं हो जाता, तुम कुछ दिन हमारे साथ खाना खा सकते हो। फिर जैसा ठीक लगे, वैसा करना।”
अंकल ने भी उनकी बात का समर्थन किया। मुझे मैडम और अंकल बहुत अच्छे लगे। मैंने कहा, “जी, धन्यवाद मैडम।”
सामान रखने के बाद विक्रम अपने घर चला गया, और मैं अपने नए कमरे में आराम करने लगा। थकान के कारण मुझे नींद आ गई। शाम को जब किसी ने दरवाजा खटखटाया, तो मेरी आँख खुली। दरवाजा खोलने पर सामने रिया खड़ी थी। उसने कहा, “मम्मी ने आपको नीचे खाने के लिए बुलाया है।”
मैंने कहा, “ठीक है, मैं अभी आता हूँ। वैसे, मेरा नाम अर्जुन है।”
उसने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, नीचे आ जाओ।”
उसकी आवाज में एक मिठास थी। मैं नीचे गया, उनके साथ खाना खाया, और फिर अपने कमरे में वापस आ गया। रात को मुझे नींद नहीं आई, क्योंकि रिया की सादगी मेरे दिमाग में घूम रही थी।
अगले दिन से मैं कोचिंग क्लास जाने लगा। कॉलेज शुरू होने में अभी समय था, लेकिन कोचिंग शुरू हो चुकी थी। सुबह जाकर दोपहर को वापस आता। इस तरह एक हफ्ता बीत गया। इस दौरान मैं रिया के परिवार के साथ घुल-मिल गया।
एक दिन रात के खाने के दौरान मैडम बोलीं, “हमारी रिया पढ़ाई में थोड़ी कमजोर है। तुम कोचिंग जा ही रहे हो, तो उसे भी थोड़ा पढ़ा दिया करो।”
रिया को पढ़ाने का विचार सुनकर मैं उत्साहित हो गया और तुरंत हाँ कर दी।
मैडम ने कहा, “कल से शाम को रिया तुम्हारे पास पढ़ने आएगी।”
मैं अगले दिन का इंतजार करने लगा।
अगली शाम को रिया मेरे कमरे में पढ़ने आई। मैंने उसे गणित के कुछ सवाल समझाए और फिर अभ्यास करने को कहा। वह मेरे सामने बेड पर बैठकर लिख रही थी। उसकी मेहनत देखकर मुझे अच्छा लग रहा था।
कुछ दिन तक हमारा यही रूटीन रहा। धीरे-धीरे हम अच्छे दोस्त बन गए। हम पढ़ाई के अलावा हल्की-फुल्की बातें और मजाक भी करने लगे। एक दिन रिया ने बताया कि उसका कोई करीबी दोस्त नहीं है, और मैंने भी यही कहा। इससे हमारी दोस्ती और गहरी हो गई।
एक दिन मैडम के भाई की तबीयत अचानक खराब हो गई। मैडम और अंकल को उनके गाँव जाना पड़ा। रिया के पास परीक्षा थी, इसलिए वह घर पर ही रुक गई। मैडम ने मुझसे कहा, “अर्जुन, जब तक हम वापस न आएँ, तुम रिया का ख्याल रखना और घर की देखभाल करना।”
मैंने उन्हें आश्वासन दिया, “आप निश्चिंत होकर जाएँ।” उस दिन शाम को मैडम और अंकल चले गए। घर पर सिर्फ मैं और रिया रह गए।
शाम को खाना खाने के बाद रिया पढ़ने मेरे कमरे में आई। हमने पढ़ाई शुरू की। पढ़ते समय मैंने देखा कि रिया बार-बार मेरी ओर देख रही थी। मैंने पूछा, “क्या बात है?”
वह हँसते हुए बोली, “बस, ऐसे ही।”
पढ़ाई के बाद उसने कहा, “मुझे अकेले नीचे सोने में डर लगता है।”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं, अगर तुम्हें ठीक लगे तो तुम मेरे कमरे में सो सकती हो।”
वह थोड़ा सोचकर बोली, “ठीक है, मैं नीचे का ताला लगाकर आती हूँ।”
वह ताला लगाकर वापस आई और हमने पढ़ाई के बाद थोड़ी देर बातें कीं। फिर हम दोनों सोने की तैयारी करने लगे। रिया को लाइट जलाकर सोने की आदत थी, जबकि मुझे अंधेरे में। हमने लाइट ऑन रखी और बातें करते-करते सो गए।
रात को मेरी नींद खुली तो देखा कि रिया मेरे बगल में बैठी थी। मैंने पूछा, “क्या हुआ? डर लग रहा है?”
वह शरमाते हुए बोली, “नहीं, बस नींद नहीं आ रही थी।”
मैंने हँसते हुए कहा, “कोई बात नहीं, हम दोस्त हैं। अगर कुछ कहना चाहती हो, तो बता सकती हो।”
वह हँसी और बोली, “बस, ऐसे ही। तुम बहुत अच्छे दोस्त हो।”
हमने थोड़ी देर और बातें कीं, और फिर नींद आ गई। सुबह मैं कोचिंग नहीं गया, और रिया भी अपने कमरे में आराम करती रही। शाम को मैडम और अंकल वापस आ गए।
इसके बाद भी रिया और मैं पढ़ाई के बहाने रोज मिलते रहे। हमारी दोस्ती और गहरी होती गई। शिमला में मेरा समय रिया के परिवार के साथ बहुत अच्छा बीता। उनकी सादगी और मेहमाननवाजी ने मेरा दिल जीत लिया।
तो दोस्तो, यह थी मेरी शिमला में नए आशियाने की कहानी। आपको यह कहानी कैसी लगी?
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